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यदि आप भी मसल टॉनिक लेते हैं तो हो जाएं सावधान, जहर से कम नहीं है

एक वयस्क का सामान्य ब्लड प्रेशर 120/80 mm और 140/90 mm के बीच माना जाता है, लेकिन जब सिद्धार्थ (बदला हुआ नाम) को अस्पताल लाया गया तो उसका ब्लड प्रेशर 220/140 mm/hg था। टेस्ट किए गए तो पता चला कि क्रेटिनाइन का स्तर भी सामान्य स्तर से छह गुना अधिक था। सिद्धार्थ की ऐसी हालत देख डॉक्टर भी हैरान रह गए। उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि एक हेल्दी दिखने वाले नवयुवक की हालत असल में इतनी खराब है।

यदि आप भी मसल टॉनिक लेते हैं तो हो जाएं सावधान, जहर से कम नहीं है
ANIL ARORAANIL ARORA | Updated: Tuesday, March 12, 2019, 23:31

पूछताछ करने पर पता चला कि सिद्धार्थ पश्चिमी दिल्ली का रहने वाला है और एक टूर ऑपरेटर है। उसे अपनी खूबसूरत टोन्ड बॉडी पर बेहद गुमान था और अपने जिम ट्रेनर की सलाह पर वह पिछले चार साल से प्री-वर्कआउट सप्लिमेंट्स ले लहा था। इनमें कैफीन, अमीनो ऐसिड्स और क्रेटीन शामिल हैं जोकि एनर्जी लेवल को सपॉर्ट करते हैं और मांसपेशियों को मज़बूत बनाने के अलावा सहनशक्ति को भी बढ़ाते हैं।

सिद्धार्थ ने कहा, `चार साल पहले मेरे ट्रेनर ने सलाह दी कि मुझे एक्सर्साइज़ से पहले एक प्री-वर्कआउट फॉर्म्युला लेना चाहिए। इससे मुझे शरीर में एक अजीब सी एनर्जी महसूस हुई। मेरा एनर्जी लेवल बढ़ गया। मैं आराम से भारी से भारी चीजें उठा सकता था। घंटों तक मैं काफी भार उठाकर खड़ा रह सकता था।`

32 वर्षीय सिद्धार्थ साल 2003 से जिम जा रहे हैं। उन्होंने हेल्थ सप्लिमेंट्स का सेवन तब तक जारी रखा जब तक कि उनकी किडनी खराब न हो गई। बकौल सिद्धार्थ, `मुझे बाद में पता चला कि इस तरह के सप्लिमेंट्स सिर्फ कम समय के लिए होते हैं या फिर इन्हें कुछ अंतराल पर खाया जाता है।`

बीएलके सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल स्थित डिपार्टमेंट ऑफ नेफ्रोलॉडी और रीनल ट्रांसप्लांट के हेड और डायरेक्टर डॉ. सुनील प्रकाश के मुताबिक, अगर उनके बीपी को समय रहते दवाओं से कम नहीं किया जाता तो सिद्धार्थ की मौत ब्रेन हैमरेज के कारण हो सकती थी। जब वह अस्पताल में आया, तो उसका क्रेटिनाइन स्तर सामान्य सीमा यानी 0.84-1.21mg के मुकाबले 6.7 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर था। सिद्धार्थ की किडनी फेल हो जाती है और फिर आजीवन उसे डायलिसिस पर रहना पड़ता।

सौभाग्य से, सिद्धार्थ के मामले में, बीपी को कंट्रोल करने के लिए दी जाने वाली दवाइयों के अलावा हेल्थ सप्लिमेंट्स को रोकने और डाइट रेस्ट्रिक्शन्स की वजह से उसे इस खतरे से बाहर निकाल लिया गया। लेकिन अब उसे अपने खाने-पीने का खास ख्याल रखना होगा। उसे देखना होगा कि कि उसकी हेल्थ के लिए क्या खाना सही है और क्या नहीं। साथ ही नियमित तौर पर एक्सर्साइज़ भी करनी होगी। डॉक्टर के मुताबिक, सिद्धार्थ की किडनी को पूरी तरह से ठीक नहीं किया जा सका है, जिसकी वजहग से उसे स्ट्रीट फूड न खाने की सलाह दी गई। उसे कड़ी एक्सर्साइज़ न करने की भी सलाह दी गई है और सिर्फ रोज़ाना सैर करने के लिए कहा गया है।

डॉ. माथुर ने आगे कहा कि अस्पताल में सभी किडनी मरीजों में से 10% युवा हैं जो हेल्थ सप्लिमेंट्स के अत्यधिक सेवन से ग्रस्त हैं। उन्होंने आगे कहा कि हेल्थ सप्लिमेंट्स की वजह से उनके तीन मरीजों की किडनी फेल हो चुकी है। वहीं एनीटाइम फिटनस के प्रबंध निदेशक विकास जैन ने कहा कि जिम जाने वाले लगभग 20 पर्सेंट पुरुष इस तरह की खुराक लेते हैं। “उच्च प्रोटीन ड्रिंक्स भी काफी आम हैं। अगर उन्हें मेडिकल सुपरविज़न के तहत लिया जाए तो ही वे सही हैं।

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